ग्रंथसार
पाण्डवों ने गन्धमादन पर्वत के दिव्य शिखरों पर किस प्रकार शांति और तप का जीवन व्यतीत किया?
वनपर्व · अध्याय 172
गन्धमादन पर सुखद प्रवास और ऋषि वृषपर्वा का आश्रम