ग्रंथसार
धर्मराज के गूढ़ और सत्यनिष्ठ उत्तरों से संतुष्ट होकर राजा नहुष सर्प-योनि से मुक्त होकर दिव्य लोक को प्रस्थान कर गए।
वनपर्व · अध्याय 180
नहुष-युधिष्ठिर संवाद और शापमुक्ति