ग्रंथसार
सहस्रों ब्राह्मणों के भरण-पोषण की चिंता में डूबे धर्मराज को मुनि शौनक ने संसार और वैराग्य का शाश्वत सत्य समझाया।
वनपर्व · अध्याय 2
शौनक मुनि द्वारा युधिष्ठिर को शोक-निवारक उपदेश