ग्रंथसार
मिथिला के बाजार में मांस बेचते कसाई को देखकर ब्राह्मण दंग रह गया, पर कसाई ने बिना पूछे ही उसका मर्म जान लिया।
वनपर्व · अध्याय 201
कौशिक का मिथिला गमन और व्याध से भेंट