ग्रंथसार
समस्त लोकों में व्याप्त पावक, पवमान और शुचि नामक त्रिविध अग्नियों तथा उनके कार्यों का विस्तार से वर्णन हुआ।
वनपर्व · अध्याय 218
विभिन्न पावन तथा लौकिक अग्नियों का विवरण