ग्रंथसार
स्वाहा ने सप्तर्षियों की पत्नियों का रूप धारण कर अग्निदेव का मनोरथ पूर्ण किया और उनके तेज को श्वेत पर्वत के शरवण में स्थापित किया।
वनपर्व · अध्याय 220
स्वाहा का छल-रूप और शरवण में वीर्य-निक्षेप