ग्रंथसार
द्रौपदी ने सत्यभामा को समझाया कि तंत्र-मंत्र नहीं, अपितु निःस्वार्थ सेवा, विनम्रता और कर्त्तव्य-पालन ही गृहस्थ का सच्चा आधार है।
वनपर्व · अध्याय 234
द्रौपदी द्वारा पतिव्रत एवं गृहस्थ-धर्म का उपदेश