ग्रंथसार
दीर्घायु महर्षि मार्कण्डेय ने पाण्डवों की दशा देखकर एक विचित्र मुस्कान के बाद अश्रु बहाए।
वनपर्व · अध्याय 26
महर्षि मार्कण्डेय का आगमन