ग्रंथसार
कोटिक ने लौटकर बताया कि वह कोई साधारण मानवी नहीं बल्कि पांचाली है, किन्तु कामांध जयद्रथ ने चेतावनी की अनदेखी कर दी।
वनपर्व · अध्याय 261
कोटिक द्वारा जयद्रथ को द्रौपदी का परिचय देना