ग्रंथसार
पाण्डवों से अपमानित होकर छूटे जयद्रथ ने प्रतिशोध की ज्वाला में जलते हुए भगवान शंकर की घोर तपस्या आरम्भ की।
वनपर्व · अध्याय 271
जयद्रथ को महादेव जी से वरदान