ग्रंथसार
मार्कण्डेय जी ने रावण के जन्म की कथा सुनाते हुए पुलस्त्य कुल के विस्तार और लंकापति के प्राकट्य का रहस्य उद्घाटित किया।
वनपर्व · अध्याय 273
रावण, कुम्भकर्ण और विभीषण की उत्पत्ति