ग्रंथसार
मार्कण्डेय जी ने धर्मराज युधिष्ठिर को समझाया कि जब साक्षात भगवान राम को भी वन के दारुण कष्ट सहने पड़े, तो फिर साधारण मनुष्यों के दुखों की क्या गणना?
वनपर्व · अध्याय 290
मार्कण्डेय जी द्वारा युधिष्ठिर को सान्त्वना