ग्रंथसार
देवराज इन्द्र ने कर्ण की अप्रतिम दानशीलता से मुदित होकर उसे अपनी अमोघ शक्ति सौंपी और स्वर्गलोक को प्रस्थान किया।
वनपर्व · अध्याय 308
इन्द्र द्वारा अमोघ शक्ति प्रदान करना और प्रस्थान