ग्रंथसार
पति को तृणशय्या पर सोते देख द्रौपदी के हृदय से फूटा संताप और उन्होंने विधाता की न्यायप्रियता पर उठाए गहरे प्रश्न।
वनपर्व · अध्याय 31
द्रौपदी का संताप और दैव पर विचार