ग्रंथसार
पाण्डवों के तीक्ष्ण बाणों से बचकर वह मायावी मृग आँखों से ओझल हो गया और पाँचों भाई प्यास और थकावट से व्याकुल होकर गिर पड़े।
वनपर्व · अध्याय 311
मृग का पीछा और पाण्डवों की थकावट व विलाप