ग्रंथसार
ज्येष्ठ भ्राता की आज्ञा और परिजनों की शुभकामनाएँ लेकर अर्जुन दिव्य अस्त्रों की खोज में उत्तर दिशा की ओर निकल पड़े।
वनपर्व · अध्याय 38
अर्जुन का तपस्या हेतु इन्द्रकील पर्वत की ओर प्रस्थान