ग्रंथसार
बारह वर्षों की निरन्तर प्रतीक्षा के बाद कलि को वह एक क्षण मिल गया, जिसने धर्मराज नल के जीवन की दिशा ही बदल दी।
वनपर्व · अध्याय 58
कलि का नल में प्रवेश और पुष्कर को द्यूत के लिए उकसाना