ग्रंथसार
धूल-धूसरित, आधे वस्त्र में लिपटी और पागलों जैसी दशा में भटकती दमयन्ती जब चेदिराज के प्रासाद के सम्मुख पहुँची, तब राजमाता की दृष्टि उस पर पड़ी।
वनपर्व · अध्याय 67
चेदिराज के राजभवन में दमयन्ती का आश्रय