ग्रंथसार
धूल की परत हटते ही दमयन्ती के ललाट का जन्मजात पद्म-चिह्न चमक उठा—और राजमाता की आँखें यह जानकर छलक उठीं कि वह उनकी ही सगी भानजी थी।
वनपर्व · अध्याय 70
दमयन्ती का कुल-परिचय और विदर्भ-प्रस्थान