ग्रंथसार
अयोध्या के राजा ऋतुपर्ण के सारथी बाहुक ने पर्णाद के संदेश को सुनकर फूट-फूटकर विलाप किया था—दमयन्ती समझ गई कि वही उसका नल है।
वनपर्व · अध्याय 72
पर्णाद का आगमन और बाहुक का रहस्योद्घाटन