ग्रंथसार
दूसरे स्वयंवर की बात सुनकर आहत नल ने असाधारण वेग वाले अश्वों को रथ में जोता और यात्रा आरम्भ की।
वनपर्व · अध्याय 77
ऋतुपर्ण और बाहुक का विदर्भ प्रस्थान