ग्रंथसार
देवर्षि मुनि नारद ने तीर्थ-माहात्म्य की महिमा का उपसंहार करते हुए धर्मराज युधिष्ठिर को तीर्थाटन का पावन संकल्प दिया।
वनपर्व · अध्याय 85
पुलस्त्य-कथा का उपसंहार एवं नारद का प्रस्थान