ग्रंथसार
महर्षि धौम्य ने पूर्व दिशा की पुण्यसलिला नदियों, नैमिषारण्य और गया जैसे पावन क्षेत्रों का वैभव बताया।
वनपर्व · अध्याय 87
धौम्य द्वारा पूर्व दिशा के तीर्थों का वर्णन