ग्रंथसार
महर्षि मैत्रेय के हितकारी वचनों का उपहास उड़ाते हुए दुर्योधन ने अपनी जंघा थपथपाई, जिस पर क्रुद्ध मुनि ने उसे महाविनाशकारी शाप दे दिया।
वनपर्व · अध्याय 9
दुर्योधन की धृष्टता और मैत्रेय का शाप