ग्रंथसार
नयी सुबह की लालिमा के बीच, जब आश्रम में सूतजी महाराज ने अज्ञातवास के उन कठिन क्षणों की चर्चा छेड़ी, तो देवरात की जिज्ञासा जाग्रत हो गई।
विराटपर्व · अध्याय 11
कौरवों का क्रूर आक्रमण