ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस महान रण का स्मरण मात्र ही आज भी वीर हृदय में अद्भुत ओज भर देता है, देवरात!
विराटपर्व · अध्याय 14
गांडीव की गर्जना