ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस भीषण रण में जब गांडीव की टंकार सुनाई दी, तो साक्षात काल भी स्तब्ध रह गया था।
विराटपर्व · अध्याय 15
महाजनों से सामना