ग्रंथसार
काल के गर्भ में छिपे सत्य जब बाहर आने को छटपटाते हैं, तब समय स्वयं रुक कर प्रकटीकरण की प्रतीक्षा करने लगता है।
विराटपर्व · अध्याय 18
प्रकटीकरण की बेला