ग्रंथसार
आश्रम की शांत संध्या में जब दीप प्रज्वलित हुआ, तो देवरात के मन में उभरे उन क्षणों के प्रश्न, जब पांडवों की शक्ति का पुनर्गठन हुआ था।
विराटपर्व · अध्याय 34
मित्रों का मिलन