ग्रंथसार
गुरुदेव, जब धर्म के सारे द्वार बंद हो जाते हैं, तब क्या इतिहास का पहिया युद्ध की ओर मुड़ना ही नियति बन जाता है?
विराटपर्व · अध्याय 36
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