ग्रंथसार
अंधेरी नृत्यशाला में गूँजती वह गर्जना साक्षात् काल का आह्वान थी, जिसने मत्स्य राज्य के अहंकार को एक झटके में धूल में मिला दिया।
विराटपर्व · अध्याय 4
कीचक का वध