ग्रंथसार
नयी सुबह की पहली किरण के साथ ही हमारे आश्रम में इतिहास के उस स्वर्णिम क्षण की गूँज सुनाई दे रही है, जब मुखौटों के पीछे से सत्य का सूर्य उदय हुआ था।
विराटपर्व · अध्याय 47
पांडवों का प्रकटीकरण