ग्रंथसार
गुरुदेव, जब धर्म के रक्षक ही विपत्ति में हों, तब पांडवों का मौन भंग होना क्या अज्ञातवास की पूर्णाहुति का संकेत था?
विराटपर्व · अध्याय 58
गौ-हरण का संकट