ग्रंथसार
नयी आशाओं और कूटनीति के मिलन से रची गई वह बेला, जब धर्म की रक्षा के लिए समूचा आर्यावर्त एक स्वर में गूँज उठा था।
विराटपर्व · अध्याय 66
मित्रों का आगमन