ग्रंथसार
भक्तों के वर्णन अनुसार — हिमालय की नीरवता में खोजते हुए वे यात्री, जो दुनिया की भागदौड़ छोड़कर एक ऐसे संत के पास आए, जिसकी आँखों में उन्हें अपना ही प्रतिबिंब मिला।
भक्त, शिष्य और आश्रम · कथा 3
साठ और सत्तर के दशक के खोजी