ग्रंथसार
महाराज-जी के आश्रमों में लंगर का महत्व केवल भोजन तक सीमित नहीं है, यह तो निस्वार्थ सेवा का एक बड़ा स्वरूप है।
भक्त, शिष्य और आश्रम · कथा 9
प्रसाद, लंगर और सेवा का मार्ग