ग्रंथसार
भक्तों के वर्णन अनुसार — एक बार जब रसोई में आग बेकाबू हो रही थी, महाराज जी ने केवल अपनी दृष्टि और मौन से ही उसे शांत कर दिया।
चमत्कार-कथाएँ · कथा 18
रसोई की अग्नि और महाराज जी का मौन