ग्रंथसार
भक्तों के वर्णन अनुसार — 11 सितंबर 1973 को जब महाराज जी ने वृंदावन में शरीर छोड़ा, तब वहाँ एक ऐसी शांति छा गई जिसे श्रद्धालु आज भी अपनी स्मृतियों में महसूस करते हैं।
चमत्कार-कथाएँ · कथा 20
समाधि-दिवस की मौन गूँज