ग्रंथसार
भक्तों के वर्णन अनुसार — महाराज-जी बिना कुछ कहे, आने वाले व्यक्ति के हृदय में छिपी बात को जान लेते थे।
चमत्कार-कथाएँ · कथा 3
हृदय की बात जानना