ग्रंथसार
भक्तों के वर्णन अनुसार — महाराज-जी का जाना केवल एक शरीर का विदा होना था, उनकी कृपा का प्रवाह आज भी निरंतर बना हुआ है।
जीवन यात्रा · कथा 12
कालजयी गूंज