ग्रंथसार
हम जैसे लोगों के साथ समय बिताते हैं, धीरे-धीरे हमारा व्यक्तित्व भी वैसा ही ढलने लगता है।
चाणक्य नीति · पाठ 6
परामर्श और संगति का चयन