ग्रंथसार
शत्रुता का अंत केवल हिंसा या कठोरता से नहीं, बल्कि नीति और बुद्धिमत्ता के प्रयोग से होता है।
चाणक्य नीति · पाठ 8
शत्रुओं के साथ व्यवहार और विवेक