ग्रंथसार
हमारा चरित्र और हमारे निर्णय केवल हमारी सोच से नहीं, बल्कि हमारे चारों ओर के परिवेश से निर्मित होते हैं।
पंचतंत्र और हितोपदेश · पाठ 8
सुसंगति का मूल्य