ग्रंथसार
एक राज्य केवल भूमि और स्वर्ण का विस्तार नहीं होता, बल्कि वह विश्वास के धागे से बंधी प्रजा का हृदय होता है।
विदुर नीति · पाठ 10
प्रजा खोने वाला शासक