ग्रंथसार
तृष्णा का अंतहीन कुआं कभी नहीं भरता, और यही लोभ अंततः मनुष्य के विवेक को ग्रस लेता है।
विदुर नीति · पाठ 8
लोभ विनाश का मूल कारण