ग्रंथसार
जब मन में अपराध का कांटा चुभता है, तो रात का सन्नाटा भी एक गूंजती हुई चेतावनी बन जाता है।
विदुर नीति · पाठ 9
अनिद्रा और अंतःकरण का स्वर