ग्रंथसार
हम अक्सर जीवन में बड़े-बड़े पुण्य और धर्म-कर्म करने की सोचते हैं, पर शायद सबसे बड़ा धर्म हमारे बहुत पास ही होता है।
आज का चिंतन · पाठ 11
आज का चिंतन: दया