ग्रंथसार
प्रार्थना केवल कुछ माँगने की सूची नहीं, बल्कि उस परम सत्ता के साथ हृदय का मौन संवाद है।
आज का चिंतन · पाठ 18
प्रार्थना: माँगना नहीं, जुड़ना