ग्रंथसार
कभी किसी ज़रूरतमंद को एक सिक्का देकर, या किसी भूखे प्राणी को एक रोटी का टुकड़ा देकर, क्या आपने अपने ही भीतर एक हल्की सी प्रसन्नता अनुभव की है?
आज का चिंतन · पाठ 26
दान का भाव