ग्रंथसार
जब मन में बहुत उथल-पुथल हो, तो बस थोड़ी देर के लिए किसी पेड़ को, बहती नदी को, या खुले आकाश को देख लीजिए।
आज का चिंतन · पाठ 39
प्रकृति की शांति